- भारत का राष्ट्रगान 'जन गण मन' और राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' है। उसी प्रकार भारत के विभिन्न राज्यों का भी अपना-अपना राजकीय गीत होता है। राजकीय गीत किसी राज्य की संस्कृति, इतिहास, परंपरा, प्राकृतिक सौंदर्य और गौरव का प्रतीक होता है।
- छत्तीसगढ़ का राजकीय गीत "अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार..." है। इस गीत में छत्तीसगढ़ की चार प्रमुख नदियों—अरपा, पैरी, महानदी और इंद्रावती—का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है। यह गीत छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक वैभव और छत्तीसगढ़ महतारी की भावपूर्ण स्तुति प्रस्तुत करता है।
- इस गीत की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार एवं भाषाशास्त्री डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा ने वर्ष 1973 में की थी। इसी वर्ष रायपुर के सुकतेल भवन, जोरापारा में डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा ने स्वयं इस गीत का प्रथम सार्वजनिक गायन भी किया था।
- गीत की रचना के लगभग 46 वर्ष बाद, 3 नवंबर 2019 को छत्तीसगढ़ राज्य के 20वें स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित राज्योत्सव के समापन समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस गीत को छत्तीसगढ़ का राजकीय गीत घोषित किया। इसी समारोह में पहली बार इस गीत का राजकीय गीत के रूप में आधिकारिक गायन भी किया गया।
- इसके बाद 18 नवंबर 2019 को राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने के साथ ही "अरपा पैरी के धार..." को विधिवत छत्तीसगढ़ का राजकीय गीत घोषित कर दिया गया। इस प्रकार राज्य गठन के लगभग 19 वर्ष बाद छत्तीसगढ़ को अपना आधिकारिक राजकीय गीत प्राप्त हुआ। राजकीय गीत की मानक गायन अवधि 1 मिनट 15 सेकंड निर्धारित की गई है।
- आज यह गीत राज्य के सभी महत्वपूर्ण शासकीय कार्यक्रमों के प्रारंभ में गाया जाता है। विद्यालयों, महाविद्यालयों और शासकीय कार्यालयों के प्रार्थना स्थलों पर भी इसका गायन किया जाता है। इसके अतिरिक्त, छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रत्येक सत्र के प्रारंभ में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के बाद छत्तीसगढ़ के राजकीय गीत का सामूहिक गायन किया जाता है।
- महत्वपूर्ण तथ्य -
- छत्तीसगढ़ का राजकीय गीत – अरपा पैरी के धार
- रचनाकार – डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा
- रचना वर्ष – 1973
- प्रथम सार्वजनिक गायन – 1973, सुकतेल भवन, जोरापारा, रायपुर
- राजकीय गीत घोषित – 3 नवंबर 2019
- राजपत्र में प्रकाशन – 18 नवंबर 2019
- मानक गायन अवधि – 1 मिनट 15 सेकंड
- गीत में वर्णित प्रमुख नदियाँ – अरपा, पैरी, महानदी और इंद्रावती


